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30/9/21

Where to buy the best domain and why it is important to get a domain

कहां से खरीदे बेहतरीन डोमेन, और क्यों जरूरी है डोमेन लेना ( Where to buy the best domain, and why it is important to get a domain)

                        एक बेहतरीन Domain खरीदने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और बढ़िया Domain कहां से खरीदे। आज हर युवा अपनी-अपनी Website बना रहा है और अपने Domain को रजिस्टर भी करवा रहा है लेकिन Domain Registration के लिए जरूरी होता है कि हमें बेहतरीन और सस्ती डोमेन खरीदने के लिए वेबसाइट के बारे में पता होना चाहिए।

Where to buy the best domain and why it is important to get a domain


आज हम इसी विषय पर विस्तार से चर्चा करेगें।

डोमेन क्या है ( What is Domain ):-

                                                                       जब कभी भी हम Blogger अथवा WordPress पर अपनी वेबसाइट बनाने के बारे में सोचते हैं तो हमारे  दिमाग में डोमेन का नाम आता है, डोमेन किसी भी वेबसाइट का नाम होता है, अर्थात् उस वेबसाइट की पहचान होती है, जिस सिस्टम से हमारे डोमेन नेम को चलाया जाता है उसे  DNS System  कहा जाता है।

उदाहरणः

.com

.edu.

.in

.org

.uk

और ये सभी Extension होते है, और इन  Extension के भी अलग-अलग प्रकार होते हैं।


Top Level Domain जैसे .com जो किसी भी प्रकार की कॉमर्शियल वेबसाइट बनाने के काम आती है, 

उसी प्रकार

.edu किसी भी शैक्षणिक संस्था की वेबसाइट बनाने के प्रयोग आती है।

उसी प्रकार

.org भी किसी बड़ी संस्था के नाम को दर्शाता है।


कैसा डोमेन लेना चाहिए (Which domain should be taken):?

                                                                                                                          डोमेन खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान जरूर देना चाहिए।

जैसेः

1. डोमेन छोटा होना चाहिए अर्थात् डोमेन ऐसा हो जिसे आसानी से याद किया जा सके, बड़ा डोमेने लोगों को याद करने में दिक्कत होती है।


2. डोमेन देखने में आर्कषक लगना चाहिए अर्थात् जिस नीस से सम्बन्धित आपकी वेबसाइट है उसके बारे में ही आपके डोमेन में जानकारी होनी चाहिए.

 यदि आप बचत से सम्बन्धित कोई वेबसाइट बना रहे हैं तो Savings/Finance जैसे शब्द आपके डोमेन में दिखने चाहिए।


3. Domain अधिकतम तीन शब्दों तक हो तो ज्यादा बेहतर है, जिसे आसानी से पढ़ा जा सकें।



क्या डोमेन जरूरी है (Is domain required):?

                                                                                       कई बार लोगों के दिमाग में आता है कि क्या बिना डोमेन खरीदे भी वेबसाइट बनाई जा सकती है, या फिर डोमेन लेना आवश्यक है?

हम आपकी जानकारी के लिए बता दें जब इंटरनेट का विकास हुआ उस वक्त वेव एड्रेस नही होते थे और I.P. एड्रेस के माध्यम से ही हम किसी कंटेट तक पहुंचतें थे। I.P. जिसका अर्थ होता है Internet Protocol.

इंटरनेट पर मौजूद समस्त सामग्री का अपना एक आई.पी. एड्रेस होता है, यहां तक कि आप जिस डिवाइस का प्रयोग कर रहें है, उसका भी अपना एक आई.पी एड्रेस होता है, जो आपके पहचान की पुष्टि करता हैं।

अब जैसे-जैसे इंटरनेट का विकास हुआ तो सभी वेबसाइट के लिए उनका एड्रेस होने लगा और यही एड्रेस इनकी पहचान बन गया।

जैसेः

          www.google.com

उक्त उदाहरण में  www (world wide web) एक sub domain है  google किसी वेबसाइट का नाम है, और .com उसका extension है

जैसे ही हम इंटरनेट पर ये एड्रेस डालते हैं  गूगल का होमपेज खुलकर सामने आ जाता है और यही डोमेन  है जो इसकी पहचान है.



कहां से खरीदे डोमेन (Where to buy domain:)

                                                                                     आज इंटरनेट पर कई वेबसाइट है जो डोमेन और वेबहोस्टिंग को खरीदने का प्लेटफार्म उपलब्ध करवाती है,

जैसेः

  •  GoDaddy  जो भारत में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध वेबसाइट है। यहां से आप किसी भी प्रकार का डोमेन और वेबहोस्टिंग सर्विसेस को खरीद सकते हैं।

  •  Hostinger  ये वेबसाइट भी एक बेहतरीन होस्टिंग सर्विस उपलब्ध करवाती है, जहां से आप आसानी से टॉप लेवल डोमेन भी खरीद सकते हैं।

  • MilesWeb माइल्स वेव भी युवाओं की बेहतरीन पसन्द है, जहां पर लोग अपने डोमेन को रजिस्टर करके, बेहतरीन वेव होस्टिंग भी खरीद सकते हैं।

इसके अलावा अन्य वेबसाइट भी जिन पर विजिट करके आप आसानी से अपने लिए एक बेहतरीन डोमेन खरीद सकते हैं।

आशा है कि आपको डोमेन से सम्बन्धित ये जानकारी पसन्द आयी होगी।










26/9/21

When 5G services will be launched in India what is its specialty? भारत में कब तक लांच हो सकती है 5जी की सेवाएं क्या है विशेषता इसकी

आज विश्व के कई देशों में 5जी की सुविधा उपलब्ध है परन्तु अभी तक हमारे भारत देश में 5जी की सुविधा उपलब्ध नही हो पायी है।

लेकिन अभी हाल ही में जो अपडेट्स निकलकर आ रही है उससे ऐसा ही लग रहा है कि हमें बहुत जल्दी ही 5जी की सेवा अपने India में देखने को मिलेगी।

आइये जानते हैं इस लेख के माध्यम से आखिर कब तक हम भारत में 5जी की सेवाओं का आनंद ले पायेगें।

When 5G services will be launched in India what is its specialty? भारत में कब तक लांच हो सकती है 5जी की सेवाएं क्या है विशेषता इसकी


हम सभी जानते हैं कि भारत में इस वक्त लगभग सभी मोबाइल कम्पनियों के द्वारा 5G के फोन को लांच कर दिये गये हैं। परन्तु बिना 5
जी सेवाओं के 5जीस्मार्टफोन बेकार हैं।


भारत में पहला 5जी फोन कौन सा था?

                                              आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भारत का पहला 5G फोन जनवरी 2020 में ही लांच हो गया था जो रियलमी कम्पनी का X50 PRO 5G था, परन्तु बिना 5G सेवाओं के 5जी फोन लांच करने का कोई औचित्य नही रह गया था और आज की स्थिति ऐसी हो गयी है कि 5G के स्मार्टफोन की संख्या बहुत हो गयी थी।


कब तक लांच हो सकती है 5जी सेवा (When can 5G service be launched)? 

                                                                                                      अभी हाल ही हमारे देश के दूरसंचार मंत्रालय की तरफ से बहुत बढ़िया अपडेट्स निकलकर आयी है जो इस बात की ओर संकेत करती है कि संभवतः हमें इस सेवा का लाभ बहुत जल्दी मिलने वाला है और वो भी संभवतः सस्ती दरों पर ही।


                हम सभी को याद है जब भारत में जियो ने अपने 4जी सिम लांच किये थे तो दूरसंचार क्षेत्र में एक नई क्रांति सी आ गयी थी और इस सिम को पाने के लिए लोगों में इतनी होड़ थी जिसका कोई जवाब नही था। जैसे ही सस्ती दरों में जियों ने अपने प्लान लांच किये तो एयरटेल और वोडाफोन ने भी अपनी-अपनी दरों में काफी कटौती कर दी थी।

आपको बता दे कि आज हमारे भारत देश में अन्य देशों के मुकाबले सबसे सस्ती दरों में कॉल रेट और डाटा उपलब्ध है, जिसका प्रयोग पूरी भारत देश की आबादी रहती है।


केन्द्रीय दूसरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव जी ने इस बात की पुष्टि की है कि फरवरी, 2020 में 5जी Spectrum की नीलामी होगी, उनका ये कहना है कि ये काम संभवतः जनवरी, 2022 में ही कर दिया जाये। क्योंकि ट्रायल्स के लिए DOT(Department of Telecommunications) ने स्पैक्ट्रम को Allocate किया था और सभी नेटवर्क कंपनियां अपने-अपने स्तर पर 5G की टेस्टिंग कर भी रही हैं, और जैसे ही ये सारी कंपनियां नीलामी में हिस्सा लेकर अपने-अपने लिए स्पैक्ट्रम एलोकेट करवाती हैं तब जाकर कंपनियां बहुत तेजी से इस पर काम करेगीं और अपने-अपने उन क्षेत्रों में 5G की सेवाओं को लांच करेंगी, जहां पर पहले से हाई स्पीड 4G की सेवाएं चल रही हैं।


अब यदि दूरसंचार मंत्री जी बात को लेकर यदि हम चलते हैं तो हमें ये सारी सुविधाएं जल्दी ही देखने को मिलने वाली है, और यदि फरवरी में नीलामी होती है, तो 4-6 महीने में इस पर बहुत तेजी से काम हो जायेगा।


क्या खासियत है 5G की? आइए अभी जानते है (What is the specialty of 5G? let's know now)?


1. 4जी के मुकाबले 5जी की गति लगभग 15 गुने से भी ज्यादा है। मतलब 5जी से हमारी डाउनलोडिंग स्पीड काफी ज्यादा होती है, और वास्तव में इसके माध्यम से आप सिर्फ मिनटों में ही 1 जीबी या 2 जीबी की मूवीज को आसानी से डाउनलोउ कर सकते है।


2. 5जी के माध्यम से 4 के अथवा 8 के कंन्टेट को बिना बफरिंग के देख पायेगें।


3. 5जी में हमें 1जीबी/एस तक की डाउनलोडिंग की गति और 300 से 400 एमबी/पीएस की स्पीड से अपलोडिंग करने की सुविधा भी मिलेगी।


4. 5जी के माध्यम से मेडिकल/स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति आ जायेगी, जिससे रोबोटिक सर्जरी काफी आसान हो जायेगी। टेलीमेडिसिन के जरिये आसानी से आपरेंशन हो पायेगें।


5. इन सबके अलावा 5जी टेक्नॉलॉजी की मदद से  सेल्फ ड्राइविंग कार, स्मार्ट कार तथा ऑनलाइन लर्निंग के क्षेत्र में भी क्रांति आयेगी। 


6. 5G टेक्नोलॉजी के माध्यम से ट्रैफिक के क्षेत्र में काफी सुधार होगा, जिससे यातायात की सुविधाओं में अत्यधिक विस्तार होगा, और जाम की स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सकेगा।


हम सभी को आशा ही नही बल्कि पूरा विश्वास है कि 5G की सेवाएं हमारे भारत में शीघ्रातिशीघ्र लांच की जायेगी, जिसका फायदा पूरे भारत के लोगों को मिलेगा।


आशा है 5जी से जुड़ी उक्त जानकारियां आप सभी को पसंद आयी होगीं,

अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करें।





















21/9/21

To get AdSense approval keep these 5 things in mind एडसेंस का अप्रूवल लेने के लिए इन 5 बातों का ध्यान जरूर रखें

एडसेंस अकाउन्ट में इन गलतियों को करने से आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


एडसेंस जो कि गूगल का ही उत्पाद है, जिसके माध्यम से गूगल तो पैसा कमाता ही है, साथ ही साथ हमें भी कमीशन देता है।

आज बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी कंपनियां विज्ञापनों के माध्यम से ही ढेर सारा पैसा कमा रही है। और बहुत से ब्लॉगर और यूट्यूबर भी इसी एडसेंस अकाउन्ट के माध्यम से ही ढेर सारा पैसा कमाने में लगे हुये हैं।

To get AdSense approval, keep these five things in mind एडसेंस का अप्रूवल लेने के लिए इन पांच बातों का ध्यान जरूर रखें


कैसे मिलता है (how to get):-

एडसेंस का अप्रूवल प्राप्त करने के लिए आपके पास अपना Blog अथवा YouTube चैनल होना आवश्यक होना चाहिए। ब्लॉग के लिए हम यही कहना चाहेंगें कि यदि आपके पास Custom domain होगा तो आपको एडसेंस का अप्रूवल मिलने में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न नही होगी।


  • आपका कंटेट Unique और बेहतरीन होना चाहिए, कहीं से भी चुराया हुआ नही होना चाहिए।

  • एडसेंस का अप्रूवल लेने के लिए आपके ब्लॉग पर कम से 20-25 यूनीक पोस्ट होनी चाहिए।

  • एक बेहतरीन पोस्ट के लिए 800 से 1000 शब्द अवश्य होने चाहिए। तथा  नियमित अंतराल पर पोस्ट लिखे होने चाहिए।

  • आपके ब्लॉग पर Contact us, About us, Disclaimer तथा Privacy Policy के पेज होने चाहिए, इसके बिना आपको कभी भी एडसेंस का अप्रूवल मिल ही नही सकता है।

कहां से मिलता है एडसेंस का अप्रूवल (Where to get AdSense approval):-

                                                                                                     जब आपके ब्लॉग पर 20-25 यूनीक पोस्ट लिखे हो, तब आप एडसेंस अप्रूवल के लिए अप्लाई कर सकते हैं।


कितना समय लगता है  how long does it take :-

AdSense का अप्रूवल कई बार इस बात पर निर्भर करता है कि आपका ब्लॉग किस नीस पर कार्य कर रहा है, कुछ ब्लॉग पर गूगल बहुत जल्दी अप्रूवल दे देता है, परन्तु कुछ मामलों में सिर्फ 1 दिन के अन्दर भी एडसेंस का अप्रूवल आसानी से मिल जाता है।

वैसे गूगल की तरफ से इसके लिए अधिकतम 15 दिवस का समय निर्धारित है।


एडसेंस का अप्रूवल मिलने के बाद क्या करें

What to do after getting AdSense approval ?

जैसे ही एडसेंस का हमें अप्रूवल मिलता है, हम अपनी वेबसाइट पर या Manual तरीके से Ad Code को पेस्ट कर देते है, या फिर Auto Ad को ऑन कर देते हैं, और एडसेंस अपने हिसाब से आपकी वेबसाइट पर विज्ञापनों को दिखाने का कार्य करता है।


एडसेंस का अप्रूवल मिलने के बाद अकाउन्ट को कैसे वैरिफाई करेंः

How to verify the account after getting the approval of AdSense

एडसेंस आपके अकाउन्ट को तब वैरिफाई करता है,जब आप अपने एडसेंस अकाउन्ट में अकाउन्ट वैरीफिकेशन का ऑप्शन दिखायी देने लगता है, यहां पर आपके द्वारा जो भी अपना पता डाला जाता है, उसी पते की पुष्टि करने के लिए गूगल आपके पते पर एक मेलर भेजता है, जिसमें आपके अकाउन्ट का वैरीफाई करने हेतु 6 अंकों का पिन होता है। यह पिन आपको अपने एडसेंस अकाउन्ट को वैरीफाई करने का विकल्प उपलब्ध करवाता है।

जैसे ही आप अपने अकाउन्ट में वैरीफाई पर क्लिक करते है, आपसे 6 अंकों का पिन इंटर करने को कहा जाता है, जैसे ही आप उक्त पिन अपने अकाउन्ट में डालते हैं, आपका अकाउन्ट वैरीफाई हो जाता है।


क्या अपने ब्लॉग पर बिना कुछ लिखे भी एडसेंस का अप्रूवल लिया जा सकता है?

                                                                                                  ये बात सही है, Interactive Visuals के माध्यम से अपनी बात रखने पर एडसेंस का अप्रूवल मिल जाता है, चाहे फिर आपने अकाउन्ट में कुछ लिखा हो अथवा नही।

कई बार ऐसा होता है कि कई ब्लॉगर को लिखने का ज्ञान नही होता है, परन्तु वह अपनी बातों को "इंटरेक्टिव विजुअल्स" के माध्यम से बताने का प्रयास करते हैं, ऐसे ब्लॉग पर यदि ट्रैफिक आने लगता है, तो आप आसानी से अपने ब्लॉग हेतु एडसेंस अप्लाई कर सकते हैं, और आपको आसानी से एडसेंस का अप्रूवल मिल जाता है। 


यदि बैंक अकाउन्ट में गडबड़ी हो तो क्या करें?


कई बार ऐसा होता है जब हम सभी को एडसेंस का अप्रूवल तो मिल जाता है, परन्तु उसके बाद जब हम अपने बैंक खाते में जानकारियां भरते है तो उसमें कुछ गड़बड़िया दिखायी देने लगती है, जैसेः Invalid Swift code, अथवा Invalid IFSC code।

यदि इस प्रकार का कोई भी Error आपको दिखायी दें, तो सर्वप्रथम आप अपने अकाउन्ट के बैंक खाते के साथ-साथ स्विफ्ट कोड, आई.एफ.एस.सी कोड को पुनः चेक करें और और फिर से सभी डिटेल को डाले।

यदि समस्या ठीक हो जाती है तो ठीक है, अन्यथा आप चाहे तो गूगल को उक्त समस्या बताते हुए लिख सकते है, और अपने प्राइमरी खाते को हटाकर अपने दूसरे बैंक के अकाउन्ट के डिटेल को दे सकते हैं जिससे आप जो पैसा अपने ब्लॉग के माध्यम से कमाये वो आपके दूसरे खाते में स्थानान्तरित हो जायें।


आशा है एडसेंस से जुड़ी ये सारी जानकारियां आपको पसन्द आयी होगी।























19/9/21

Get treatment anywhere in India with a Smart Health Card, know about the whole process

क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन और ये कैसे काम करेगा?

What is National Digital Health Mission and how will it work?

Get treatment anywhere in India with a Smart Health Card, know about the whole process


केन्द्र सरकार बहुत ही जल्द एक राष्ट्र एक स्वास्थ्य कार्ड लांच करने जा रही है, जिसके माध्यम से भारत का कोई भी नागरिक भारत में कहीं पर भी अपना इलाज करवा सकेगा।

क्या है इस योजना की विशेषता और खासियत सब कुछ इस आर्टिकल के माध्यम से जानिये।


एक देश एक राशन कार्ड योजना के बाद भारत सरकार बहुत जल्दी इस योजना को लाने जा रही है, इस योजना का नाम है  "National Digital Health Mission" 


ये कैसे काम करेगा:-

                                     इस योजना के तहत समस्त नागरिकों को आधार कार्ड की तरह का ही एक स्मार्टकार्ड दिया जायेगा, जिस पर 14 अथवा 16 डिजिट का यूनीक नम्बर लिखा होगा, वही आपकी पहचान की पुष्टि भी करेगा। तथा इसी कार्ड में आपके द्वारा पूर्व में कराये गये समस्त इलाजों का विवरण मौजूद होगा, अर्थात् समस्त रिपोर्ट, जांच इत्यादि। जब कभी मरीज इलाज हेतु इस कार्ड को लेकर चलेगा, तो अस्पताल में इस कार्ड के माध्यम से ही उसकी पूर्व जांचों और इलाजों के विवरण को आसानी से देखा जा सकेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह समस्त डाटा एक सर्वर से ही जोड़ा जायेगा, जहां पर मरीज का पूरा विवरण स्टोर होगा।


कहां लागू की गयी है ये योजनाः

                                                              चूंकि अभी यह योजना अपने शुरूआती चरण में है, और इस योजना को केन्द्र सरकार ट्रायल के तौर पर सिर्फ केन्द्रशासित प्रदेशों जैसे चंडीगढ़, अंडमान निकोबार, दादर और नगर हवेली आदि में इसका परीक्षण कर रही है, यदि इन केन्द्र शासित प्रदेशों में इसका परीक्षण सफल रहता है तो भारत के समस्त राज्यों में इसको लागू कर दिया जायेगा।


कैसे और कहां से बनेगा ये कार्डः-

                                                                वैसे केन्द्र सरकार ने इस योजना हेतु अपनी वेबसाइट के माध्यम से कार्ड बनाने का विकल्प भी प्रस्तुत किया है, जैसा आप इस चित्र के माध्यम से देख सकते हैं।

Get treatment anywhere in India with a Smart Health Card, know about the whole process

                                                                                    image credit: NHA website 

उक्त चित्र के माध्यम से आप जैसे ही Create Health ID  पर क्लिक करते हैं, तो आपको दूसरी स्क्रीन कुछ इस तरह से ओपेन हुई दिखायी देगी।


जैसा इस चित्र में हैं

Get treatment anywhere in India with a Smart Health Card, know about the whole process


यहां पर आपको कुछ ऐसा Alert देखने को मिलेगा, जिसमें सिर्फ उन केन्द्रशासित प्रदेशों  यथा: Chandigarh, Dadra  & Nagar Haveli, Daman & Diu आदि  के आई.डी. कार्ड बनाने का विकल्प ही दिखायी दे रहा है।


जैसा कि आपको पूर्व में ही बताया गया है कि उक्त योजना पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर इन केन्द्र शासित प्रदेशों में ही लागू की जा रही है, विस्तार होते ही इसको भारत के सभी राज्यों में लागू किया जायेगा।


भारत सरकार द्वारा इस कार्ड के रजिस्ट्रेशन के लिए एक Application का निर्माण भी किया गया है, जिसके माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन करने का विकल्प उपलब्ध करवाया गया है।

ये एप्लीकेशन गूगल के Play  Store  पर मौजूद है, जिसे डाउनलोड करके रजिस्ट्रेशन का कार्य आसानी से किया जा सकता है।


उक्त के अलावा सरकार कार्ड बनाने का कार्य अस्पतालों, जिनमें सरकारी/अर्द्धसरकारी अस्पताल, तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को भी देगी, जिससे सभी लोगों का हेल्थ कार्ड बन सकें।



हेल्थ कार्ड बनवाने हेतु किन-किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी?

                                                                                                                                  चूंकि ये कार्ड भारत के सभी नागरिकों के स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने हेतु बनाया जा रहा है, और बहुत ही आसान प्रक्रिया के तहत इस कार्ड को बनाया जा सकता है, जिसके लिए सिर्फ आधार कार्ड, और आधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर, क्योंकि आधार कार्ड सबसे बेहतरीन पहचान के रूप में मौजूद है, और इसके माध्यम से ही व्यक्ति के समस्त पहचान हो जायेगी।

इन सबके अलावा कुछ सामान्य जानकारियों को भरने के बाद उक्त प्रक्रिया सम्पन्न हो जायेगी, और ये सारा काम Online  ही हो जायेगा।, परन्तु जो लोग ऑनलाइन आवेदन करने में असमर्थ है, उनके लिए Offline विकल्प के रूप में अस्पताल, और स्वास्थ्य केन्द्र मौजूद है, जहां पर जाकर आसानी से हेल्थ कार्ड हेतु आवेदन किया जा सकेगा।

हेल्थ कार्ड में मरीज की समस्त जानकारियों के साथ-साथ पुराने समस्त मेडिकल रिकार्ड मौजूद होगें, जिन्हें देखकर आसानी से डॉक्टर मरीज का आसानी से इलाज कर पायेगें।


आपको बता दें कि देश के आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा उक्त योजना को 15 अगस्त, 2020 को अमलीजामा पहनाया गया, और एक Unique I.D  से मरीजों को जोड़ने की व्यवस्था प्रारम्भ कर दी।


क्या एक कार्ड के माध्यम से भारत में कहीं पर इलाज करवाया जा सकेगा :-?

                                                                                                                                                   ये बिल्कुल सत्य है, सिर्फ इसी Smart Health Card  के माध्यम से आप भारत के किसी भी अस्पताल में अपना इलाज करवा पायेगें, पर ध्यान रखें, कार्ड मिलने के बाद संभवतः शुरू के इलाज की जानकारी आपको स्वयं भरनी पड़ेगी, तत्पश्चात् भविष्य में  जब कभी आप उक्त कार्ड को लेकर किसी भी अस्पताल में जायेगे, वहां के इलाज की सारी जानकारी आपके उक्त कार्ड के रिकार्ड में दर्ज हो जायेगीं।


आप चाहे तो कार्ड के रजिस्ट्रेशन हेतु इस लिंक  https://healthid.ndhm.gov.in/   पर क्लिक करके भी विजिट कर सकते हैं।

यहां पर आपको रजिस्ट्रेशन करने का विकल्प दिया जा रहा है।





































18/9/21

What is the Chat Off feature in Messenger, and how is it enabled, Messenger me Kya hai secret conversation.?

Facebook messenger की इन पांच विशेषताओं (Features) के बारे में नही जाना तो बेकार है।


Facebook messenger, जिसका प्रयोग आज पूरी दुनिया के करोड़ों लोगों के द्वारा किया जा रहा है, और दिन प्रतिदिन इसके उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं users की संख्या में इजाफा भी हो रहा है

What is the Chat Off feature in Messenger, and how is it enabled, Messenger me Kya hai secret conversation.?


आज Messenger का उपयोग कई देशों में इतना हो रहा है कि WhatsApp की अपेक्षा लोग फेसबुक से ही संदेश भेजना पसन्द करते हैं।


इसलिए संदेश भेजने वाले कुछ पॉपुलर एप्लीकेशन जैसे WhatsApp, Telegram, Signal, Imo आदि के बीच फेसबुक अत्यधिक प्रचलित एप्लीकेशन है।


परन्तु किसी भी एप्लीकेशन को प्रयोग करना ही पर्याप्त नही होता है, जब तक आप उसके कुछ रोचक सेटिंग्स अथवा features के बारे में न जाने।

आज फेसबुक मैसेंजर प्रयोग करने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है, लेकिन बहुत कम ही लोग है, जो इसकी विशेषताओं के बारे में जानते होगें।


आज हम उन्हीं 4  विशेषताओं के बारे में जानने का प्रयास करेंगें।

इन विशेषताओं का प्रयोग करके आप भी बेहतरीन तरीके से मैंसेजर को चलाना सीख जायेगें।


(1).  पहला सबसे बेहतरीन भी उन उपयोगकर्ताओं के लिए है जो अनावश्यक रूप से मेसेज भेजकर आपको परेशान करते रहते हैं, ये फीचर खासतौर से लड़कियों के लिए कहा जा सकता है, जो Unknown व्यक्ति द्वारा मेसेज भेजने पर परेशान होने लगती है। फेसबुक द्वारा इसके लिए एक बेहतरीन फीचर दिया गया है, जिसका नाम है Ignore massage, इसको इनेबल करने के लिए आपको उस यूजर पर लॉग प्रेस करके रखना है, दबाते ही आपको लास्ट में इग्नोर मैसेज का ऑप्शन दिखायी देगा 

जिसको इनेबल करते ही आप आसानी से किसी को भी संदेश भेजने से रोक सकते हैं।


देखिये चित्र के माध्यम से

What is the Chat Off feature in Messenger, and how is it enabled, Messenger me Kya hai secret conversation.?

(2)- 
Facebook Messenger का ये फीचर भी बहुत रूचिकर है, जिसका उपयोग आप Secret Conversation करने में उपयोग कर सकते हैं।

हम सभी जानते हैं कि व्हाट्सएप पर हम जो भी चैटिंग करते है, वो पूरी तरह end-to-end encrypted होता है, जिसे कोई भी नही देख सकता है, उसी प्रकार फेसबुक पर भी ऐसा ही फीचर है, जिसकी मदद से आप आसानी से Secret conversation चैट कर सकते है, जिसे कोई भी थर्ड पार्टी एप नही देख सकती है। 

What is the Chat Off feature in Messenger, and how is it enabled, Messenger me Kya hai secret conversation.?
                                          चित्र 2

जैसा आप चित्र 2  में देख सकते है कि उक्त चित्र में प्रोफाइल खोलते ही लास्ट में आपको Secret Conversation का विकल्प दिखायी दे रहा है, इस पर टैप करते ही सीक्रेट कन्वरसेशन इनेबल हो जाता है।


(3). कई बार आप मैसेज करते समय आप ऑनलाइन नही दिखना चाहते हैं तो ये सुविधा आपको मैसेंजर में मिल जाती है जिसका नाम हैं Chats Off , इसकी मदद से आप ऑनलाइन अगले व्यक्ति को नही दिखायी देते हैं। 


(4). फेसबुक मैसेंजर Nickname ऐसा फीचर है जिसके माध्यम से आप किसी का भी Nickname परिवर्तित कर सकते हैं।

यदि आप मैसेंजर पर किसी से बात कर रहे है, और उसे कोई निकनेम देना चाहते हैं, तो आसानी से ये काम कर सकते हैं, इसके लिए आपको सिर्फ उस यूजर का चैट ओपेन करना है, और बॉयी तरफ ऊपर टैप करते ही आपको निकनेम का फीचर दिखायी देगा जिस पर क्लिक करते ही आप आसानी से कोई भी नाम उसे दे सकते हैं।

What is the Chat Off feature in Messenger, and how is it enabled, Messenger me Kya hai secret conversation.?
                                         चित्र संख्या 3

जैसा आप इस चित्र संख्या 3 में देख सकते हैं कि इसमें निकनेम परिवर्तित करने का विकल्प दिखायी दे रहा है, जिस पर क्लिक करते ही निकनेम एडिट करने का विकल्प दिखायी देगा। उस पर आप अपनी मनपसंद का निकनेम किसी के लिए भी चुन सकते है।









12/9/21

Jio's new smartphone is coming in Diwali, will you buy? दीपावली में आने वाला है जियो का नया स्मार्टफोन क्या लेंगें आप?

आखिर क्यों टल गया जियों के नये फोन   "जियोनेक्स्ट"   (JioNext) का लांचिग टाइमः

Jio's new smartphone is coming in Diwali, will you buy? दीपावली में आने वाला है जियो का नया स्मार्टफोन क्या लेंगें आप?


मुकेश अंबानी जी की कंपनी रिलांयस जियों ने अपना पहला स्मार्टफोन जिसका नाम "Jiophone Next’’ है, का लांचिंग समय टाल दिया है, इसके पीछे के कारणों का पता नही चला, अब खबर ऐसी है कि इस स्मार्टफोन को कंपनी दीपावली के आसपास ही लांच करेगी। 


हम आपकों बता दे कि रिलांयस जियों के इस स्मार्टफोन की बिक्री 10 सितम्बर, 2021 से होनी थी।

रिलांयस जियो एक ऐसा नाम जिसने पूरे भारत में ग्राहकों के बीच अपनी एक बेहतरीन पहचान बनाई। जब कंपनी ने कीपैड वाला स्मार्टफोन सिर्फ 1500 में लांच किया था, तब ग्राहकों ने इसे हाथो-हाथ लिया था। 

अब भारतीय बाजार में फिर Jio अपना नया धमाका करने जा रहा है, क्योंकि भारत में अभी भी ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जो सिर्फ Keypad  वाले फोन का प्रयोग करते हैं, वो एंड्रॉयड स्मार्टफोन  खरीदने में असमर्थ होते हैं। उन्हीं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, रिलांयस बहुत जल्द भारतीय बाजार में सिर्फ 3000-3500 रूपये के आसपास इस नये स्मार्टफोन को लांच करेगी। जिसे संभवतः प्रत्येक निम्न वर्ग (Lower Class)  का ग्राहक भी खरीद सकेगा।


इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों के माध्यम से इसके कुछ बेहतरीन विशेषताएं भी निकलकर आयी है, जो इस फोन को बेहतर बनाती है, आइये हम उस पर भी प्रकाश डालने का प्रयास करते हैं।


डिस्प्लें (Display):-

जियोफोन नेक्स्ट में 5.5 इंच की डिस्प्ले दी गयी है, डिस्प्ले एच.डी. दिया गया है, तथा डिस्प्ले का रिजोल्यूशन 720’1440 पिक्सल है, जो स्क्रीन की साइज के हिसाब से ठीक है। उक्त के अलावा डिस्प्ले 319 पीपीआई के साथ आता है, जिससे सभी कंटेट बिल्कुल ब्राइट दिखते हैं।


कैमरा (Camera):-

इस स्मार्टफोन में 13 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया गया है, और सेल्फी के शौकीन लोगों के लिए इस फोन में 8 मेगापिक्सल का कैमरा भी है, कीमत के हिसाब तथा इसी कीमत पर मौजूद अन्य स्मार्टफोन से इस फोन का कैमरा ठीक होगा, ऐसा इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों से पता चलता है।



मैमोरी (Memory):-

किसी भी स्मार्टफोन में उसकी इंटरनल मेमोरी काफी मायने रखती है, इस फोन में कंपनी ने 2 जीबी की रैम दे रखी है, तथा आपकी सामग्री को सुरक्षित रखने हेतु इस फोन में 16 जीबी की इंटरनल मेमोरी भी दी गयी है। यदि 32 जीबी तक मेमोरी होती, तो शायद और मजा आता।


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  • कनेक्टिविटी (Connectivity):-

    जियो का ये स्मार्टफोन 4G सपोर्ट के साथ आता है, और चूंकि जियो का फोन है तो Volte तो सपोर्ट करेगा ही, इसलिए बेहतरीन इंटरनेट अनुभव के लिए ये दोनों आपको इस स्मार्टफोन में मिलेगी। उक्त के अलावा वाई-फाई, ब्लूटूथ, यूएसबी की कनेक्टिविटी भी इस फोन में देखने को मिलने वाली है।


    बैटरी (Battery):-

    इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों को यदि देखा जाये तो कुछ वेबसाइट पर इसकी बैटरी 2500 MAH है तो कुछ वेबसाइट पर 3000 MAH.

    अब क्या सच है ये फोन की लांचिंग के बाद ही पता चल पायेगा। लेकिन उपभोक्ता की जरूरतों को देखते हुए  इसमें 3000  M.A.H तक की बैटरी होनी ही चाहिए।


               "रिलांयस कंपनी को इस फोन को लांच करने में देरी का एक कारण और भी निकलकर आया है और वो ये है कि रिलांयस जियो  Google के साथ मिलकर इस फोन को और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में काम कर रहें हैं, जिससे ये स्मार्टफोन ग्राहकों के बीच अपनी एक नयी पहचान स्थापित कर सकें।"


    इन सबके अलावा इस फोन में एंड्रॉयड OS 11.0 दिया गया है जो एंड्रॉयड का लेटेस्ट वर्जन है, जबकि कई ऐसी स्मार्टफोन कंपनियां है, जिन्होंने अभी तक अपने स्मार्टफोन के लिए उक्त वर्जन को रिलीज नही किया है।


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    अभी तक हमने इस स्मार्टफोन की विशेषताओं के बारे में बात की। लेकिन सारी बातें तभी पूरी होती है, जब हम कीमत की भी बातें करें।


    टेक विशेषज्ञों का कहना है कि इस फोन की कीमत 3499 होगी। अर्थात् 3500 रूपये।

    3500 की कीमत को देखते हुए भारतीय बाजार में इस वक्त कोई भी ऐसा ब्रांड नही है जो इस कीमत पर एंड्रॉयड के लेटेस्ट वर्जन के साथ में आता हो, उक्त के अलावा इस फोन की विशेषताओं की बराबरी कर पाता हों।


    वैसे जियों जब भी कोई प्रोडक्ट लांच करता है तो वो भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को देखते हुए ही लांच करता है और ये स्मार्टफोन भी उसी का हिस्सा है।

    अब देखना कि दीपावली के आसपास Jio कैसा धमाका करता है।


    आशा है कि आपको जियों के इस फोन की विशेषताएं अच्छी लगी होगी, क्या आप इस फोन को खरीदने का मन बना रहे हैं?

    तो जरूर कमेंट करके बतायें।



    11/9/21

    who is the king of operating system, and whose operating system is the best आखिर कौन है ऑपरेटिंग सिस्टम का बादशाह?

    आखिर कौन है ऑपरेटिंग सिस्टम का बादशाह, और किसका ऑपरेटिंग सिस्टम है सबसे बेहतर?

    who is the king of operating system, and whose operating system is the best

    who is the king of operating system, and whose operating system is the best आखिर कौन है ऑपरेटिंग सिस्टम का बादशाह?


    इंटरनेट के दौर में आज हर व्यक्ति Smartphone का प्रयोग कर रहा है, और आज के समय में सभी लोग smartphone का प्रयोग कर भी रहे हैं, चाहे वह उच्च वर्ग का हो या फिर मध्यम वर्ग का अथवा निम्न वर्ग का व्यक्ति हो।


    smartphone का उपयोग करने से सुरक्षा (security ) का भी सवाल उत्पन्न हो जाता है, क्योंकि आज जिस तरीके Technology का विकास हो रहा है, उसी तरह से साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ गया है, जिसकी वजह से लोग अपने आपको असुरक्षित भी महसूस करने लगे हैं उनके द्वारा असुरक्षित तरीके से स्मार्टफोन का प्रयोग करने से असुरक्षा का खतरा भी बढ़ गया है।

    जब सुरक्षा की बात आती है तो Secured Phone  भी खरीदने की सलाह दी जाती है,  और सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating system) के माध्यम से हम इस बात को सुनिश्चित कर सकते हैं.


    आज हम सुरक्षित फोन और सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में ही बात करेगें और जानने का प्रयास करेंगें कि वास्तव में कौन सा ऑपरेटिंग सिस्टम Operating system बेहतर है।

    कुछ सालों पहले तक समय ऐसा था कि हमारे पास कई ऑपरेटिंग सिस्टम वाले फोन हुआ करते थे,

    जैसे:-

    Tizen,

    Symbian,

    Windows Operating System,

    Blackberry OS,

    Android 

    IOS इत्यादि।


    लेकिन आज के समय में इन ऑपरेटिंग सिस्टम का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है, और इस क्षेत्र में बचे हैं सिर्फ दो महारथी 

    पहला है: Android Operating System

    और

    दूसरा है: IOS

    आज के समय में कई ऐसे स्मार्टफोन यूजर है जो Android और IOS ऑपरेटिंग सिस्टम को यूज कर रहें हैं, जिनमें सुरक्षा के लिहाज से कई फायदें तो कुछ नुकसान भी हैं।


    आइये कुछ अन्तर को जानने का प्रयास करते हैं कि किन मामलों में दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम एक दूसरे से बेहतर है।


    1). एंड्रॉयड एक Open source ऑपरेटिंग सिस्टम है, मतलब आप इंटरनेट पर कहीं से भी किसी भी प्रकार का एप्लीकेशन इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे आपके फोन की सुरक्षा में सेंध लग सकता है, वहीं दूसरी तरफ आई.ओ.एस ऑपरेटिंग सिस्टम ओपेन सोर्स नही है, इसमें एप स्टोर के अलावा आप कहीं से भी कुछ डाउनलोड नही कर सकते हैं, और न ही इंस्टॉल कर सकते हैं। क्योंकि एप्पल इसकी सुरक्षा खुद करता है।


    2). IOS के मुकाबलें एंड्रॉयड में आसानी से कस्टमाइजेशन (Customization)किया जा सकता है, आप अपने फोन में किसी भी प्रकार का Launcher लगा सकता है, अपने फोन के लुक को और बेहतर कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ आई.ओ.एस में इस तरह का कोई भी विकल्प मौजूद नही रहता है। जो कि बहुत ज्यादा यूजर को परेशान भी करता हैं.


    3). सुरक्षा के लिहाज से आई.ओ.एस के एप स्टोर में फालतू के एप्लीकेशन नही होते हैं, जो हमारी सुरक्षा में सेंध लगा दे, वही दूसरी तरफ Play store में ऐसे कई एप्लीकेशन होते हैं, जो हमारी सभी प्रकार की गतिविधियों पर नजर रखने का काम करती है।

    आई.ओ.एस इसकी सुरक्षा खुद करता है और एप स्टोर के एप्लीकेशन के लिए एप्पल के कड़े नियम भी होते हैं, जिसकी वजह से एप डेवलपर को सुरक्षित एप्लीकेशन बनानी होती है।


    4). चूंकि एंड्रॉयड उपभोक्ताओं की संख्या बहुत ज्यादा है, और इस लिहाज से इसको आई.ओ.एस के मुकाबले कम सुरक्षित माना जाता है, इसका सबसे बड़ा कारण इसका ओपेन सोर्स होना, अर्थात् आपके मोबाइल से किसी भी प्रकार के एप्लीकेशन को इंस्टॉल करके फोन के डाटा का आसानी से एक्सेस किया जा सकता है, वहीं दूसरी तरह आई.ओ.एस में ऐसा संभव नही है, सिर्फ यदि फोन को जेल ब्रेक (Jail Break) न किया गया हों। 


    5). ऐसा कहा जाता है कि यदि टैक्नोलॉजी का बेहतरीन जानकार है तो वह एंड्रॉयड की कोडिंग में बदलाव कर सकता है, वहीं आई.ओ.एस में इसकी सुरक्षा में आसानी से छेड़छाड़ नही की जा सकती है।

    ये तो कुछ अन्तर थे इन दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम में, जहां पर हमें दोनों में कुछ कमियां तो कुछ  विशेषताएं देखने को भी मिली।


    "ये बात सही है कि कई टेक विशेषज्ञ इस बात को मानते हैं कि आई.ओ.एस ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रायड के मुकाबले काफी सिक्योर माना जाता है, लेकिन सुरक्षा के साथ हमें बहुत बंधनों में बंधना पड़ता है, हम एंड्रॉयड को जितना स्वतंत्र तरीके से चला सकते हैं उतनी आजादी हमें आई.ओ.एस में देखने को नही मिलती है।"


    कैंसे सुरक्षित रहें एंड्रॉयड उपभोक्ताः

    How to stay safe Android users:

                                            देखिये यदि सुरक्षित तरीके से किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम को उपयोग में लाया जाये तो, हम अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं। ये अच्छी बात है कि गूगल इस दिशा में काफी अच्छा काम कर रहा है, और वो समय-समय पर सुरक्षित यू.आई को लांच करता रहता है। और नये अपडेटेड वर्जन के साथ सुरक्षा के नये-नये फीचर्स भी लेकर आता रहता है।

    अब ये बात सही है कि एंड्रॉयड अपने पिक्सल सीरीज में ये काम जल्दी कर देता है, वहीं दूसरी ओर कंपनियां अपने-अपने स्मार्टफोन में उक्त सुरक्षित वर्जन काफी देर में लांच करती हैं।


    "इसलिए समय के साथ-साथ अपने फोन को हमेशा अपडेट करना चाहिए, जिससे उसकी सुरक्षा में कोई बाधा उत्पन्न न होने पाये।"



    कितने उपभोक्ता है:?

                                 विश्व स्तरीय फर्म Statista.com  के अनुसार वर्ष  June, 2021  में पूरे विश्व में 75  प्रतिशत से भी ज्यादा उपभोक्ता एंड्रायड के हैं, वहीं दूसरी ओर लगभग 22  प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा आई.ओ.एस के उपभोक्ता है, जो कि एंड्रॉयड के मुकाबले काफी कम है।

    इतने बड़े अन्तर का सबसे बड़ा कारण एंड्रायड के सस्ते स्मार्टफोन का उपलब्ध होना भी है, जहां पर हमें 3000 रूपये में ही एंड्रॉयड का डिवाइस मिल जाता है, वहीं दूसरी ओर एप्पल के स्मार्टफोन के लिए हमें 20000 से भी ज्यादा रूपये की धनराशि अदा करनी पड़ती है वो भी एक साधारण से एप्पल फोन के लिए।


    आशा है आपको आई.ओ.एस तथा एंड्रायड की कुछ विशेषताओं और कमियों के बारे में जरूर जानने को मिला होगा।




















    2/9/21

    What is scrappage policy, And how will they work?, आखिर क्या है स्क्रैपेज पॉलिसी और ये कैसे काम करेंगी।

    आखिर क्या है स्क्रैपेज पॉलिसी? और ये कैसे काम करेंगी।

    What is scrappage policy? And how will they work?


    आईये पहले आप स्क्रैप के बारे में जान लीजिएः

    हमने कई बार इंटरनेट पर वाहनों को कुछ ही मिनटों में स्क्रैप (छोटे-छोटे हिस्सों में क्षतिग्रस्त करने ) वाले वीडियों अवश्य देखे होगें। जिनमें वाहनों को कई हिस्सों में क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है। इसी प्रक्रिया को ही स्क्रैपिंग (Scrapping) कहा जाता है।


    केन्द्र सरकार बहुत जल्द सभी राज्यों के लिए नई स्क्रैपेज पॉलिसी लेकर आने वाली है। सरकार का ये मानना है कि उक्त पॉलिसी वाहन निर्माताओं से लेकर वाहन खरीदने वालों के लिए अत्यन्त लाभदायक सिद्ध होगी।

    अभी हाल ही में केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन व राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस स्क्रैपेज पॉलिसी से गाड़ियों की बिक्रियों 30 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। वही दूसरी तरफ इसकी लागत में 30-35 प्रतिशत की कमी आयेगी अर्थात् लागत मूल्य (Manufacturing Cost)  बहुत कम हो जायेगी। और लागत कम होने से लोग वाहनों को आसानी से खरीद भी सकेगें।


    इस पॉलिसी को लागू करने के लिए देश में लगभग 1 करोड़ से भी ज्यादा वाहनों को Scrap करना पड़ेगा। स्क्रैप करने के बाद नये वाहनों की भी जरूरत पड़ेगी और मांग में अच्छी-खासी उछाल भी आने की संभावना रहेगी। नई गाड़ियों की बिक्री से सरकार को जी.एस.टी (GST) के रूप में कई हजार करोड़ रूपये तक का राजस्व  (Revenue)  मिल सकता है।


    आपको बता दें कि  दुनिया के कुछ विकसित देशों में  Scrapping policy चल भी रही है, जहां पर लोग अपने पुराने वाहनों Old Vehicle को स्क्रैपिंग सेंटर में देकर क्षतिग्रस्त करवा देते हैं, और वहां की सरकारें लोगों को नये वाहन क्रय करते समय टैक्स में छूट भी प्रदान करती है.


    क्या भारत में स्क्रैपिंग पॉलिसी से लाभ होगाः?

    Will the scrapping policy in India benefit:?

    चूंकि विदेशों में यह प्रक्रिया आसान है, वही दूसरी ओर भारत में क्या स्क्रैंपिंग सफल हो पायेगी, इसके जवाब में यही कहा जायेगा, कि इस दिशा में भारत सरकार काम करने जा रही है।

    अभी हॉल ही देश के सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने इस बारे में बताया कि हमारे देश में गाड़ी निर्माण में प्रयोग होने वाली मुख्य धातु एल्युमीनियम और कॉपर का कम उत्पादन होता है, जिसके लिए हमें उक्त उत्पादों को दूसरे देशों से मंगवाना पड़ता है, लेकिन स्क्रैप पॉलिसी लागू करने के बाद उक्त समस्या से छुटकारा मिल सकेगा, और हमें पुराने वाहनों से ही उक्त उत्पाद मिल जायेगें, जिन्हें पुनः रिसाइकिल/परिष्कृत करने के बाद प्रयोग में लाया जा सकेगा।


    क्या भारत में लोग स्क्रैपिंग को पसन्द करेंगें?

    Will people in India like scraping?

                                                                  भारत एक विशाल देश है, इसकी विशालता के साथ-साथ यहां पर वाहनों की भी बहुत ज्यादा संख्या है, और भारत में तीन वर्गों के लोग रहते हैं

    उच्च वर्ग  (Higher Class)

    मध्यम वर्ग (Middle Class)

    निम्न वर्ग (Lower Class)

    • यहां पर उच्च वर्ग Higher class के लोग करोड़पति वर्ग की श्रेणी में ही आते हैं, जो अपनी बेहतरीन जीवन शैली जीना पसन्द करते हैं, और हर छः माह अथवा साल भर के अन्दर अपने चार पहिया वाहन को बेचकर वाहन खरीदना पसन्द करते हैं, उनके लिए ये स्क्रैप पॉलिसी बेहतर साबित हो सकती है।

    • मध्यम वर्ग Middle Class  में वो तबका आता है, जो सेकेण्ड हैंण्ड, थर्ड हैंण्ड गाड़ियों को खरीदना पसन्द करता है, उनके लिए स्क्रैप पॉलिसी तभी लाभकारी साबित हो सकती है जब सरकार स्क्रैप करवाने पर अच्छी धनराशि प्रदान करें, या नये वाहन को खरीदने पर टैक्स में  Relaxation (छूट) प्रदान करे।

    • निम्न वर्ग  Lower Class के लोग उन श्रेणियों में आते हैं, जो सिर्फ अपने कमाने और खाने के बारे में ही सोचते हैं।

    अब देखना है कि उक्त पॉलिसी पूरे देश में कब तक लागू होती है?

    लेकिन यदि आम जनता को ध्यान में रखते हुए इस पॉलिसी को लागू को लागू किया जाता है तो इसका लाभ प्रत्येक वर्ग को मिलने की पूरी संभावना है।


    आशा है आप सभी को स्क्रैपिंग पॉलिसी  Scrapping Policy  से जुड़ी ये जानकारी पसन्द आयी होगी।